Tuesday, May 20, 2008

(1) अमन के दुश्मनछुप-छुपकर हम पर करता है क्यूं तू वारअपनी नामर्दानगी का क्यूं सबूत देता है हरबारहमारे सामने आ, या जी चाहे जहां हमें वहां बुलाकसम मां भारती की, अब पानी सर से गुजर गयायुद्ध में आ, मुहब्बत में आ , अमन में आतेरी मर्ज़ी, तेरी रज़ा, चाहे जिस चीज में आहर बार मुंह की खाई है, याद है कि भूल गयाजयपुर के सीरियल बम्ब लास्ट हों फिर याकारगिल घुसपेट हो या मुंबई बम्ब धमाकेक्या जी नहीं भरा तेरा, हमको सताकेअरे! बेवकूफ,तूने जब भी हमको हादिसा दियाइस बात पर क्या ग़ौर नहीं कियाहर हिंदू हर मुस्लमांमेरे वतन का हरेक इन्सांबुरे वक्त में एक है मिलाअ मूर्ख अब भी समझ जामाना मैं वजह हूं तेरे दर्द कीऔर वजह मेरे गम कीपर ये भी सच है यार मेरेहम मरहम हैं, इक-दूसरे के ज़ख़्म की।2अमन के दुश्मनवतन के दुश्मनओ दहशतगर्दओ नामर्दबेकसूरों को मारता हैडराता है धमकाता हैक्यूं दूध अपनी मां का लजा़ता हैतुझे हादिसा देना आता हैहमें हादिसे से उभरना आता हैमत भूलसहन-शक्ति है हममें गांधी-सीऔर हमें सुभाष भी बनना आता है(3)एक अक्ल का पुतलाअक्ल के घोड़े दौड़ा रहा थाकौन अपना है कौन पराया हैहिसाब ये लगा रहा थाये सोचते-सोचते उसकी सोचनशक्तिचरखे की तरह चक्कर काटने लगी थीयानी उसकी अक्ल चकराने लगी थीउसकी अक्ल पर था पत्थर पड़ाउस अक्ल के दुश्मन को न था ये पताकि चल पड़ा है उसका वक्त बुराउसको ये इल्म न थाकि आदमी का जब वक्त बुरा होता हैजैसे सोचता है वो वैसे कब होता हैयानि ऊंट पर बैठे को कुत्ता काट लेता हैऔर आदमी अपने थूके को चाट लेता हैआदमी का जब वक्त बुरा होता हैमैंने उससे कहा-अ बछिया के ताऊदुनिया की रीत कब तेरे समझ आवेगीइस बगुला भक्त दुनिया मेंबकरे की मां कब तक खैर मनावेगीबड़ी मछली, छोटी मछली को ही तो खावेगीमैंने उससे कहा-ये दुनियापहले तो तेरी अपनी बनकरबात तेरे मन की पूछ जावेगीऔर एक बात की फिर बात सौ बनावेगीफिर मज़ाक तेरा उड़ावेगीयानि जख़्मों पर तेरे नमक लगावेगीदुनिया की ये रीत कब तेरे समझ आवेगीमैंने फिर कहा-इस दुनिया में अगर है रहनापड़ेगा इस दुनिया-सा होनायानी सीख ले पगलेबहती गंगा में हाथ धोनाकरे कोई अहसान तुझपेउस अहसान को भूल जानायदि किसी से काम हो निकलवानामीठी छुरी बनकर उसके अंदर घुस जानामरने के बाद ही बैद्य बुलानामाल मुफ्त, दिल बेरहमइस नीति को अपनानामेरी मान मुंह देखे की मुहब्बतसमझे है ये जमानायदि ऐसा करता जावेगाभली करेंगे राम जरूरतेरा अच्छा वक्त भी आवेगातेरा हर काम सरल हो जावेगाबिल्ली के भाग्य येहर छीका टूट जावेगाआने वाली पीढ़ियों कोतेरा तज़रबा काम आवेगा----संपर्क :डॉ. अनुज नरवाल ‘रोहतकी’454/33 नया पड़ाव, काठ मण्डीरोहतक-124001 हरियाणाईमेल - dr.anujnarwalrohtaki@gmail.com

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