Thursday, May 22, 2008
bal kavita
बादल अंकल, बादल अंकलतुम तो हो बड़े ही चंचलरात हो या हो दोपहरीघूमते हो तुम नगरी-नगरीज़मीन की तुम बुझाते हो प्यासहर प्राणी की तुम हो आसहमारी नगरी तुम जब भी बरसेख़ास पकवान खाने को हैं मिलतेपर जब तुम बेमौसम आते होकिसानों की मुसीबत बन जाते होकृपा तुम ऐसे न आया करोसावन रुत में ही बूंदें बरसाया करोयानी धरा में सौंधी खुशबू उगाया करोजब भी, जहां भी बरसा करोपहले वहां के बारे में सोचा करो2गर्मी हो या हो सर्दीपल भर के लिए भी न रूकेंरिंकी-पिंकी, गोलू-मालूमिलके सब आगे बढ़ेंमन लगाकर खूब पढ़ेंआओ स्कूल चलेआओ स्कूल चलेनेक राह पर चलते रहें हमअर्ज़ी मालिक से करेंस्वस्थ रहने के लिएकसरत हर रोज़ करेंआदर करें बड़ों का हमगुरूजनों का सम्मान करेंआओं हरेक सपने काहकीकत रूप धरेंअपने ज्ञान की ज्योति सेप्रकाशमान जगत को करेंहिंदू बने न मुसलमान बनेबनना है तो इंसान बनेंपढ़ने और पढ़ाने कासत्य प्रयास बनआओ स्कूल चलें3होना है अगर कामयाबतो खुद पर रखिए एतमादकाम करने से पहलेकरो तुम खुदा को यादऐसा अगर हो गयामुझको है एतबारछा जाएंगे आपहौसलें बुलंद होंदिल में उमंग होंकाम में लगन हो ऐसीदेख, मुश्किलें दंग होंजीवन जीने के लिएसबसे अलग ढ़ंग होबात अगर ये जम गईफिर तो वक्त करेगा वहीजो चाहेंगे आपमुझको है एतबारछा जाएंगे आपज़िंदगी नहीं मिली अपने लिएअपने लिए तो सब है जिएसब हैं जिए अपने लिएअपने लिए तुम जिएतो फिर तुम क्या जिएऔरों की खुशी के लिएआप अगर हैं जिएसब के लबों परमुस्कुराऐंगें आपमुझको है एतबारछा जाएंगे आप----
Tuesday, May 20, 2008
(1) अमन के दुश्मनछुप-छुपकर हम पर करता है क्यूं तू वारअपनी नामर्दानगी का क्यूं सबूत देता है हरबारहमारे सामने आ, या जी चाहे जहां हमें वहां बुलाकसम मां भारती की, अब पानी सर से गुजर गयायुद्ध में आ, मुहब्बत में आ , अमन में आतेरी मर्ज़ी, तेरी रज़ा, चाहे जिस चीज में आहर बार मुंह की खाई है, याद है कि भूल गयाजयपुर के सीरियल बम्ब लास्ट हों फिर याकारगिल घुसपेट हो या मुंबई बम्ब धमाकेक्या जी नहीं भरा तेरा, हमको सताकेअरे! बेवकूफ,तूने जब भी हमको हादिसा दियाइस बात पर क्या ग़ौर नहीं कियाहर हिंदू हर मुस्लमांमेरे वतन का हरेक इन्सांबुरे वक्त में एक है मिलाअ मूर्ख अब भी समझ जामाना मैं वजह हूं तेरे दर्द कीऔर वजह मेरे गम कीपर ये भी सच है यार मेरेहम मरहम हैं, इक-दूसरे के ज़ख़्म की।2अमन के दुश्मनवतन के दुश्मनओ दहशतगर्दओ नामर्दबेकसूरों को मारता हैडराता है धमकाता हैक्यूं दूध अपनी मां का लजा़ता हैतुझे हादिसा देना आता हैहमें हादिसे से उभरना आता हैमत भूलसहन-शक्ति है हममें गांधी-सीऔर हमें सुभाष भी बनना आता है(3)एक अक्ल का पुतलाअक्ल के घोड़े दौड़ा रहा थाकौन अपना है कौन पराया हैहिसाब ये लगा रहा थाये सोचते-सोचते उसकी सोचनशक्तिचरखे की तरह चक्कर काटने लगी थीयानी उसकी अक्ल चकराने लगी थीउसकी अक्ल पर था पत्थर पड़ाउस अक्ल के दुश्मन को न था ये पताकि चल पड़ा है उसका वक्त बुराउसको ये इल्म न थाकि आदमी का जब वक्त बुरा होता हैजैसे सोचता है वो वैसे कब होता हैयानि ऊंट पर बैठे को कुत्ता काट लेता हैऔर आदमी अपने थूके को चाट लेता हैआदमी का जब वक्त बुरा होता हैमैंने उससे कहा-अ बछिया के ताऊदुनिया की रीत कब तेरे समझ आवेगीइस बगुला भक्त दुनिया मेंबकरे की मां कब तक खैर मनावेगीबड़ी मछली, छोटी मछली को ही तो खावेगीमैंने उससे कहा-ये दुनियापहले तो तेरी अपनी बनकरबात तेरे मन की पूछ जावेगीऔर एक बात की फिर बात सौ बनावेगीफिर मज़ाक तेरा उड़ावेगीयानि जख़्मों पर तेरे नमक लगावेगीदुनिया की ये रीत कब तेरे समझ आवेगीमैंने फिर कहा-इस दुनिया में अगर है रहनापड़ेगा इस दुनिया-सा होनायानी सीख ले पगलेबहती गंगा में हाथ धोनाकरे कोई अहसान तुझपेउस अहसान को भूल जानायदि किसी से काम हो निकलवानामीठी छुरी बनकर उसके अंदर घुस जानामरने के बाद ही बैद्य बुलानामाल मुफ्त, दिल बेरहमइस नीति को अपनानामेरी मान मुंह देखे की मुहब्बतसमझे है ये जमानायदि ऐसा करता जावेगाभली करेंगे राम जरूरतेरा अच्छा वक्त भी आवेगातेरा हर काम सरल हो जावेगाबिल्ली के भाग्य येहर छीका टूट जावेगाआने वाली पीढ़ियों कोतेरा तज़रबा काम आवेगा----संपर्क :डॉ. अनुज नरवाल ‘रोहतकी’454/33 नया पड़ाव, काठ मण्डीरोहतक-124001 हरियाणाईमेल - dr.anujnarwalrohtaki@gmail.com
ghazal
1muhabbat kee thi to nibhaee to hotikoee pyar kee jyoti jalaee to hotibhoole se gar khata ho gaee thi hamasekabhi aakar tumane bataee to hotiauron ko vafa kee sikh dene valeye sikh khud toone apanaee to hotivafa ka bevafaee se kyoon diya silakamiyan kya thi ginaeen to hoti'anuja' mujh pe likh dali kitab toonekoee gazal khud pe banaee to hoti-----
---.2
aadat ho gaee hai sabakee, juban se firana aajakalaho gaya hai ik shauk, muhabbat karana aajakaladil har roj jane kitane cheharon pe marata haiho gaya hai kis kadar aasan marana aajakalajism tak hi mahadood kyon ho gaee har nazarakyon nahin chahata koee dil men utarana aajakalamashahoor hone ke lie ye kaisa divanapan haikarate hain pasand nazaron se bhi girana aajakalaaankh band karake yakeen kar lete ho sab par tumahai bevakoofi 'anuja' aisa kuchh karana aajakala--------
.3
aankhon men basa lijepalakon pe bitha lijesurkhi banakar mujhakohothon pe laga lijefool banakar mujhakobalon men saja lijechunari banakar mujhakosine se laga lijekangana banakar mujhakohathon men saja lijebindiya banakar mujhakomathe par laga lijesindoor banakar mujhakomang men saja lijekuchh bhi bana lije paramujhako apana bana lije.
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aadat ho gaee hai sabakee, juban se firana aajakalaho gaya hai ik shauk, muhabbat karana aajakaladil har roj jane kitane cheharon pe marata haiho gaya hai kis kadar aasan marana aajakalajism tak hi mahadood kyon ho gaee har nazarakyon nahin chahata koee dil men utarana aajakalamashahoor hone ke lie ye kaisa divanapan haikarate hain pasand nazaron se bhi girana aajakalaaankh band karake yakeen kar lete ho sab par tumahai bevakoofi 'anuja' aisa kuchh karana aajakala--------
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